27  प्रकाशितवाक्य

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Vinod Kumar Prochia

Apostle Vinod Kumar Prochia was born on 5 April 1983. He is an Indian Christian preacher and spiritual leader. He is the founder of Vinod Kumar Prochia Ministries, which is also known as Aatmik Jagrti Church. This church was established in 2005 and is located in Punjab in the village of Ajouli, Unna district, Himachal Pradesh.

प्रकाशितवाक्य (Revelation) नए नियम की 27वीं पुस्तक है, जिसे यूहन्ना ने लिखा है। यह पुस्तक मुख्यतः भविष्यवाणियों, दैवीय न्याय, और अंत समय की घटनाओं पर केंद्रित है।

मुख्य विषय:

  1. भविष्यवाणियाँ और अंत समय:
    • अंत समय की घटनाएँ, दैवीय न्याय, और यीशु के माध्यम से भविष्यवाणियाँ।
  2. सात चर्चों के संदेश:
    • एशिया माइनर के सात चर्चों के लिए विशेष संदेश और उनके सामने आने वाली चुनौतियाँ।
  3. दैवीय विजय:
    • यीशु की विजय, दैवीय न्याय, और नए आकाश और नई पृथ्वी का आगमन।

प्रमुख खंड:

  1. प्रस्तावना और दर्शन (अध्याय 1):
    • यूहन्ना का यीशु के दर्शन और प्रकाशितवाक्य के विषय की प्रस्तावना।
  2. सात चर्चों के संदेश (अध्याय 2-3):
    • एशिया माइनर के सात चर्चों के लिए विशेष संदेश और उनकी स्थिति की समीक्षा।
  3. स्वर्गीय दर्शन (अध्याय 4-5):
    • स्वर्गीय दृश्यों का विवरण, परमेश्वर और मेम्ने (यीशु) की पूजा।
  4. सात मुसीबतें (अध्याय 6-11):
    • सात मुसीबतें, शंखों की आवाज़, और दैवीय न्याय की घटनाएँ।
  5. संतान और पश्चात्ताप (अध्याय 12-14):
    • परमेश्वर के संतों की सुरक्षा, बड़े संघर्ष, और अंत समय की घटनाएँ।
  6. सात कप (अध्याय 15-16):
    • सात कप, दैवीय क्रोध की पराकाष्ठा, और अंतिम न्याय।
  7. बेबीलोन की पतन और अंतिम न्याय (अध्याय 17-19):
    • बेबीलोन की पतन, अंत समय की घटनाएँ, और अंतिम न्याय।
  8. नया आकाश और नई पृथ्वी (अध्याय 20-22):
    • अंतिम विजय, नए आकाश और नई पृथ्वी का आगमन, और परमेश्वर का अंतिम वादा।

संरचना:

  1. अध्याय 1:
    • प्रस्तावना और दर्शन।
  2. अध्याय 2-3:
    • सात चर्चों के संदेश।
  3. अध्याय 4-5:
    • स्वर्गीय दर्शन।
  4. अध्याय 6-11:
    • सात मुसीबतें और शंखों की आवाज़।
  5. अध्याय 12-14:
    • संतों की सुरक्षा और अंत समय की घटनाएँ।
  6. अध्याय 15-16:
    • सात कप और दैवीय क्रोध।
  7. अध्याय 17-19:
    • बेबीलोन की पतन और अंतिम न्याय।
  8. अध्याय 20-22:
    • नया आकाश, नई पृथ्वी, और परमेश्वर का अंतिम वादा।

विशेषताएँ:

  1. भविष्यवाणियाँ:
    • अंत समय की घटनाओं और भविष्यवाणियों का विवरण।
  2. दैवीय न्याय:
    • दैवीय न्याय, अंतिम न्याय, और यीशु की विजय।
  3. नई सृष्टि:
    • नए आकाश और नई पृथ्वी की भविष्यवाणी और परमेश्वर के अंतिम वादे।

यह पुस्तक ईसाई विश्वासियों को अंत समय की घटनाओं और परमेश्वर की दैवीय योजनाओं के प्रति जागरूक करती है, और विश्वास की मजबूती बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है।

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